Friday, September 29, 2023

कुछ बातें सितारों कीं


क्या मनहूस घड़ी में तुमसे मिलना हुआ?

अच्छा भला जल रहे थे हम यहाँ!

आते ही तुमने माहौल को ठंडा कर दिया,

हमारा भस्म होना और मुश्किल हो गया।।। 

 


थोड़ी देर से सही, बात आई हमें समझ,

जब बैठे चाँद के नीचे, दो भाई हम सहज।

कि तुम संग, भूले हम, चाहत जलने की,

समय भी ठहरा, देख,  बहती लहरों की आवारगी।।। 

 


आखिर है यह ठंडक भी, देन उसी ब्रह्मांड की,

यह ठहराव भी है जरूरी, मर मिटना तो है ही।

भूलो तुम भी खुदको, छोड़ो, यह डर है नकली,

आओ करें अब तांडव, इस नाच में ही है ज़िंदगी।।।  


PS - The theoretical physicist brother of mine had explained the binary star systems, wherein despite being pulled back by the forced around, they continue to stick around. Moving through the universe in their own orbits, together. This poem sees it as an ever-ongoing relationship betwen the masculine and the feminine. Here a masculine star is talking to his feminine counterpart. 



क्या मायने?

तू है कहीं।

मैं हूँ कहीं।

हमें तो बस है जोड़ती,

हवस मर मिटने की।

 

शब्द मेरे, या विचार तेरे,

क्या मायने?

प्रश्न तेरे, या उत्तर मेरे,

क्या मायने?

डर तेरे, या सपने मेरे,

क्या मायने?

 

क्या मायने की अलग है अपनी जिंदगी?

जब तू भी यहीं।

और मैं भी यहीं। 


PS: We keep looking for friendships, often unseeing the people around. 

Thursday, September 21, 2023

खुजली

ये वो खाज नहीं जो सिर्फ सता के निकल जाए,

आग है ये अंदर लगी, जो सब कुछ खाख कर जाए। 

आत्मा मेरी इस आग में है तप्ति,

अधबुद्ध है मेरे इन प्राणों का ज्वालामुखी।।  


ना खोजूँ बहाने अब इससे भागने के,

अपना के इसे खुद से लगा लूँ मैं गले।  

आखिर देखो तो क्या है यह जिंदगी, 

है तो बस ये एक छोटी सी खुजली ही।।  



PS: Dedicated to those searching for their meaning in the effervescence of life. 

ओ मेरे फकीर

आया था तेरे दरबार मैं, दुनिया की चाहत ले कर,
भर दी झोली मेरी तूने, माया की शोहरत दे कर। 
आज, फिर एक अरसे बाद आया मैं, 
शोहरत भरी यह झोली ले कर।। 
 
समर्पित तेरे चरणों में, 
मेरे मुखौटों को तू स्वीकार कर।
कर दे आज विदा तू मुझे,
अपनी थोड़ी सी फकीरियत दे कर।।  

काँटों को फूल बना दे, 
तेरी स्वीकार्यता में थी ऐसी ताकत।
तेरे फटे तलवे से भी थी चमकती,
तेरे फकीरी की बादशाहत।। 

क्या वजीर, क्या राजा, और क्या कोई रक्षक,
आज न्यायाधीश भी तेरे चरणों में नगमस्तक।
दिलों में सबके दे प्रेम की दस्तक,
ऐसी मेरे फकीर की ताकत।।   



PS - Written after a recent rendezvous with Shirdi's Sai Baba. 



इमली की चुस्की

वो इमली की चुस्की,
वो जीने की चाहत,
वो अपनों की जरूरत,
और मौत की फुसलाहट। 

आज ये सब लड़े थे,
इस बंद कमरे में,
इक सिकुड़ती रज़ाई के अंदर।
 
जब वास्तविकता के तूफ़ानी थपेड़े,
थक गए नाजुक उम्मीदों के आगे,
तब हुआ वही जो तय किया था उसने
 
इस मौत के शून्य में,
जाने कब हुई मेरी देवी प्रकट - 
एक इमली की चुस्की से,
उस टूटे शरीर में उसने भर दी ताकत। 
उन टूटे दिलों  में, बना ली अपनी बसाहट।। 


PS: Dedicated to all the caregivers out there. There is huge power in our hopes. Keep hoping. 




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